अध्याय 39

वायलेट की नज़र से:

डेमन का सवाल कमरे में हवा की तरह लटक गया। उसकी खून-सी लाल आँखें मेरी आँखों में गड़ गईं। गर्म अस्पताल के कमरे के बावजूद मुझे लगा जैसे मेरा शरीर बर्फ़ हो गया हो। उसका ‘अल्फ़ा’ वाला दबदबा लहरों में मुझ पर चढ़ता चला आया। मेरी चेतना के नीचे एम्बर बेचैनी से कुलबुलाने लगी।

मैं इस पल के...

लॉगिन करें और पढ़ना जारी रखें